Top 5 Popular Motivational Stories in Hindi – शिक्षाप्रद बाल कहानियां

ये तो सब जानते है कि शिक्षाप्रद कहानियां किसी व्यक्ति के जीवन में कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। जीवन में कहीं न कहीं इस तरह की प्रेरणादायक कहानियाँ किसी भी मनुष्य को जरूर प्रभावित करती है और इस तरह की कहानी को सुनने का सिलसिला बचपन से ही शुरू हो जाता हैं। चाहे दादी माँ की कहानियां हो या नानी की।

Top 5 Best Motivational Stories in Hindi

आज मैं आप सब के बीच 5 सबसे ज्यादा पढ़ी अथवा सुनी गई शिक्षाप्रद कहानियों को लेकर उपस्थित हूँ। ये कहानियाँ किसी भी बच्चे के मन पर ऐसा अमिट छाप छोड़ती है कि इन कहानियों को भूलना मुश्किल हो जाता हैं। मुझे ऐसा लगता है लोग जब तक जीवित रहते होंगे नीचे की ये पाँचों कहानियों को कभी नहीं भूलते होंगे।

1. खरगोश और कछुआ

Khargosh kachhua-story

किसी जंगल में एक तालाब के किनारे एक कछुआ और एक खरगोश रहता था। दोनों में गहरी मित्रता थी। कछुआ अपनी धीमी चाल के लिए और खरगोश अपनी तेज चाल के लिए मशहूर था। एक बार खरगोश कछुए की धीमी चाल का उपहास उड़ाने लगा। कछुआ खरगोश के घमंड को भाप कर बोला-“मैं धीमी गति से चलता हूँ तो क्या हुआ यदि हमारी आपसी दौड़ हो जाए तो मैं तुम्हें हरा दूँगा।”

यह सुनकर खरगोश आश्चर्य से बोला-“क्यों मजाक करते हो कछुए भाई। तुम मुझे दौड़ में क्या हराओगे। पहले अपनी चाल तो देख लो।”
कछुआ बोला-“मैं मजाक नही कर रहा खरगोश भाई। मैं यकीन के साथ कह रहा हूँ कि मैं दौड़ में तुम्हें हरा दूँगा।”
खरगोश हँसते हुए बोला-“तो ठीक है, अगर तुम्हारी यही इच्छा है तो दौड़ हो जाए।”

कछुआ खरगोश की बात से सहमत हो गया। अगले दिन उन्होने तालाब के किनारे के एक मैदान को दौड़ के लिए चुना। वहाँ से एक मील दूर स्थित बरगद के पेड़ को वह स्थान माना जहाँ दौड़ खत्म होनी थी। दौड़ शुरू हो गई। खरगोश तो पलक झपकते ही दौड़ा और बहुत दूर निकल गया। लेकिन कछुआ धीमी गति से चलता रहा।
लगभग आधा मील पहुँचकर खरगोश रुका और पीछे मुड़कर देखा। जब उसे कछुआ दूर तक कही नजर नही आया तो उसने सोंचा- क्यों न कुछ देर आराम कर लूँ। जब कछुआ दिखाई देगा तो उठकर तेजी से दौड़ लूँगा। यह सोचकर वह वही एक पेड़ के नीचे बैठकर आराम करने लगा और कुछ ही देर में उसे गहरी नींद आ गई।
उधर कछुआ धीमी गति से निरंतर अपनी मंजिल की ओर बढ़ता रहा। खरगोश बहुत देर तक सोता रहा। जब वह जागा तो उसे कछुआ कहीं नजर नही आया। वह फुर्ती से उठा और तेजी से बरगद के पेड़ की ओर दौड़ने लगा। लेकिन पेड़ के निकट पहुँचते ही मानो उस पर बिजली-सी गिरी। वह यह देखकर चकित रह गया कि कछुआ तो वहां पहले से ही मौजूद था। खरगोश हार गया था।
उसने आगे बढ़कर कछुए को बधाई दी और उस दिन से उसने कछुए की धीमी चाल का मजाक उड़ाना बंद कर दिया।
शिक्षा (Moral):- लगातार परिश्रम करने से ही सफलता मिलती है साथ ही कभी कमजोर को कम नहीं समझना चाहिए क्योंकि वो कभी आपसे आगे भी निकल सकता हैं।

2. शेर और चूहा

Sher chuha-story

एक जंगल में एक शेर था| एक दिन वह दोपहर को एक पेड़ के नीचे आराम कर रहा था।
अचानक से एक चूहा उसके ऊपर आ कर कूदने लगा| कुछ देर में ही शेर नींद से जाग उठा। वह बहुत क्रोधित हुआ और गरजकर बोला- “तेरी यह हिम्मत, मैं अभी तुझे जान से मार दूँगा”
बेचारा चूहा भय से कांपने लगा। उसने शेर से विनती की- “महाराज कृपया मुझे मत मारिए। मेरी जिंदगी बख्श दीजिए। वैसे तो मैं बहुत छोटा और दुर्बल हूं, मगर मैं वादा करता हूं कि आपका एहसान जीवन भर न भूलूंगा और यदि कभी आपके किसी काम आ सका तो स्वयं को धन्य समझूंगा।”
उस पर शेर बोला- “तुम एक अत्यन्त दुर्बल और छोटे से जीव हो। मगर हो बड़े वाचाल। तुम मेरे जैसे शक्तिशाली के भला क्या काम आओगे?”
यह कहकर शेर ने चूहे को छोड़ दिया|

एक दिन की घटना है- किसी शिकारी ने जंगल में जाल डाला हुआ था। शेर शिकार के तलाश में भटक रहा था कि शिकारी के जाल में फंस गया। घबराकर वह गरजने लगा। मगर जाल बहुत मजबूत था। बेचारे सिंह की एक न चली। जाल तोड़ना उसके लिए संभव नहीं था। जब चूहे ने दूर से शेर की जोर जोर से दुख भरी दहाड़ सुनी तो वह भाग कर शेर के पास पंहुचा और उसने देखते ही देखते उस कठोर जाल को सैकड़ों स्थानों से कुतर दिया। अब क्या था, दूसरे ही क्षण शेर जाल से आजाद हो गया। जाल से बाहर आते ही शेर ने चूहे का आभार व्यक्त किया। उसे धन्यवाद दिया।
फिर वह दोनों शिकारी के आने से पहले वहाँ से चले गए|
शिक्षा (Moral) :- यह जरूरी नहीं कि छोटे प्राणी की कोई उपयोगिता न हो। कभी किसी को छोटा और कम नहीं समझना चाहिए।

3. प्यासा कौआ

pyasa kauwa-story

एक बार की बात है किसी जंगल में एक कौआ रहता था। एक दिन उसे बड़ी जोर से प्यास लगी। वह पानी की तलाश में इधर-उधर भटकने लगा। तेज गर्मी और निरंतर उड़ते रहने से उसकी प्यास और भी बढ़ने लगी। वह सोचने लगा-“अगर मुझे जल्दी ही पानी नही मिला तो मेरी मौत निश्चित है।” वह यह सोच ही रहा था कि तभी उसे दूर पानी का एक घड़ा नजर आया। वह तुरंत वहाँ पहुँचा और घड़े में झाँकने लगा। उसमें पानी तो था, लेकिन पानी इतना नीचे था कि वहाँ तक उसकी चोंच नही पहुँच सकती थी।
उसने हर तरह से पानी पीने की कोशिश की, पर सफल नहीं हुआ।
कौआ बेचैन हो उठा। वह निराश होकर वहाँ से जाना चाहता था कि तभी उसकी नजर घड़े से कुछ ही दूर पर मकान बनाने के लिए पड़ें हुए कंकड़-पत्थरों पर गई। पत्थरों को देखते ही उसके दिमाग में एक विचार कौंधा। वह कंकड़ों के पास गया और अपनी चोंच में कंकड़ ला-लाकर घड़े में डालने लगा।
कुछ ही देर में उसकी मेहनत रंग लाई और घड़े के पानी का स्तर ऊपर तक पहुँच गया। कौए ने जी भरकर पानी पिया। उसकी प्यास मिट गई। अब वह खुद को तरोताजा महसूस करने लगा। कुछ देर उसने वहीं आराम किया और फिर भोजन की तलाश में वहाँ से उड़ गया।
शिक्षा (Moral) :- हमें मुसीबत के समय दिमाग से काम लेना चाहिए। युक्ति द्वारा असंभव कार्य को भी संभव बनाया जा सकता है।

4. लालची कुत्ता

lalchi kutta-story

एक बार एक कुत्ते को बहुत जोरो की भूख लगी थी। रास्ते में चलते हुए उसे एक रोटी मिली। वह उस रोटी का पूरा आनंद लेना चाहता था इसलिए वह उसे शांति से बैठकर खाने की इच्छा से रोटी को अपने मुँह में डाल कर नदी की ओर चल दिया| नदी पर एक छोटा सा पुल था| जब कुत्ता नदी पार कर रहा था, तभी उसे पानी में अपनी परछाई दिखाई दी| उसने अपनी परछाई को दूसरा कुत्ता समझा और उसका रोटी छीनना चाहा| रोटी छीनने के लिए उसने भौंकते हुए नदी में छलाँग लगा दी| मुँह खोलते ही उसके मुँह की रोटी नदी के पानी में गिर कर बह गयी और वो लालची कुत्ता भूखा ही रह गया।
शिक्षा (Moral) :- हमें कभी लालच नहीं करना चाहिए तथा जितना मिले उतने से ही संतोष करना चाहिए।

5. धरती फट रही है

बहुत समय पहले की बात है किसी जंगल में एक गधा रहता था। उसे हमेशा प्रलय का डर सताता रहता। जैसे ही उसे खाली समय मिलता वो दुनिया के खत्म हो जाने के बारे में सोचने लगता। एक दिन वो बरगद के पेड़ के नीचे बैठकर आराम कर रहा था। उसने पेड़ के नीचे बैठे हुए सोचा, ‘अगर धरती यहां से फट जाए तो मेरा क्या होगा’?
ऐसा सोचा ही था कि उसे एक जोर के धमाके की आवाज़ आयी। वह भयभीत हो उठा और चीखने लगा “भागो-भागो धरती फट रही है, अपनी जान बचाओ…..” और ऐसा कहते हुए वह पागलों की तरह बिना कुछ देखे भागने लगा।
उसे इस तरह से भागते देख एक अन्य गधे ने उससे पूछा , “अरे क्या हुआ भाई , तुम इस तरह बदहवास भागे क्यों जा रहे हो ?”
“अरे तुम भी भागो…अपनी जान बचाओ, धरती फट रही है…” ऐसा चीखते हुए वह भागता रहा।
यह सुन कर दूसरा गधा भी डर गया और उसके साथ भागने लगा। अब तो वह दोनों एक साथ चिल्ला रहे थे- “भागो-भागो धरती फट रही है …भागो-भागो”
देखते-देखते सैकड़ों गधे इस बात को दोहराते हुए उसी दिशा में भागने लगे।
जंगल से गदहों को भागते देखकर दूसरे जानवर भी डर गये। यह खबर कानोंकान फैलती चली गयी और जल्दी ही सभी जान गए कि धरती फट रही है। कुछ देर बाद गदहों के साथ दूसरे जानवर भी भागने लगे। सभी जीव चाहे वह सांप हो या चिड़ियाँ, कीडे़-मकोडे़ हों या चार पैरों वाले जानवर, सब भागने की कोशिश कर रहे थे और भय के कारण निकलने वाली उनकी चीखों से चारों तरफ अफरातफरी मची हुयी थी।

जंगल में फैले इसे हो-हल्ले को सुन अपनी गुफा में विश्राम कर रहा जंगल का राजा शेर बाहर निकला, उसे अपनी आँखों पर यकीन नहीं हुआ कि सारे जानवर एक ही दिशा में भागे जा रहे हैं। वह उछल कर सबके सामने आया और गूंजती हुई दहाड़ के साथ बोला- “ये क्या पागलपन है ? कहाँ भागे जा रहे हो तुम सब ??”

dharti fat rahi hai-story

“महाराज, धरती फट रही है!!, आप भी अपनी जान बचाइए।” झुण्ड में आगे खड़ा बन्दर बोला।
“किसने कहा ये सब ?” शेर ने प्रश्न किया
सब एक दूसरे का मुंह देखने लगे, फिर बन्दर बोला, “मुझे तो ये बात चीते ने बतायी थी।”
चीते ने कहा, “मैंने तो ये पक्षियों से सुना था।” और ऐसे करते करते पता चला कि ये बात सबसे पहले गधे ने बताई थी।
गधे को शेर के सामने बुलाया गया।
“तुम्हे कैसे पता चला कि धरती फट रही है ?” शेर ने गुस्से से पूछा।
“मममम…. मैंने अपने कानो से धरती के फटने की आवाज़ सुनी महाराज !!” गधे ने डरते हुए उत्तर दिया
“ठीक है चलो, मुझे उस जगह ले चलो और दिखाओ कि कहां धरती फट रही है।” ऐसा कहते हुए शेर गधे को उस तरफ ढकेलता हुआ ले जाने लगा। बाकी जानवर भी उनके पीछे हो लिए और डर-डर कर उस ओर बढ़ने लगे। बरगद के पास पहुँच कर गधा बोला- “हुजूर, मैं यहीं सो रहा था कि तभी जोर से धरती फटने की आवाज़ आई, मैंने खुद उड़ती हुई धूल देखी और भागने लगा ”
शेर ने आस पास जा कर देखा और सारा मामला समझ गया।
उसने जानवरों से कहा- “आवाज पेड़ से एक बडे़ नारियल के गिरने से आयी थी। यह नारियल चट्टानों पर गिरा था, जिसकी वजह से बहुत तेज आवाज हुई थी। पत्थर सरकने से आस-पास धूल उड़ने लगी और ये गधा ना जाने कैसे इसे धरती फटने की बात समझ बैठा। सभी अपने-अपने घर वापस जाओ। धरती पूरी तरह सुरक्षित है। अगली बार से किसी अफवाह को सुनकर उस पर विश्वास करने से पहले उसकी सत्यता परखना।”
यह सुनकर सभी जानवर खुद को मूर्ख महसूस करने लगे और हंसते हुए अपने-अपने घर लौट गये।
शिक्षा (Moral) :- अफवाहों पर सीधे-सीधे यकीन मत कीजिए। पहले जांचो, परखो, फिर सुनी बातों पर यकीन करो।

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