विक्रम बेताल की कहानियां – Stories of Vikram Betaal in Hindi

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आपने राजा विक्रम और बेताल का नाम जरूर सुना होगा। मैंने भी सुना है और बच्चों का क्या कहना उनके तो दिलो-दिमाग में ही ये नाम बैठा हुआ रहता हैं। स्कूल में विक्रम-बेताल की कहानी सुनने में काफी अच्छा लगता था वो भी हिन्दी के टीचर से।
यदि आपने नही सुना तो संक्षेप में जान लीजिए।
राजा विक्रम उज्जैन देश के राजा थे। वे एक योगी के कहने पर बेताल को मसान में स्थित पीपल के पेड़ से उतारकर योगी के पास लाने के लिए जाते है लेकिन बेताल भी कम चालाक नहीं था। वो बार-बार राजा के बंधन से छूट वापस पेड़ पर जा लटकता था।

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Stories of Vikram Betaal in Hindi

जब राजा विक्रम, बेताल को लेकर चलते तो बेताल एक ही शर्त पर चलने को तैयार होता। उसका शर्त था की राजा विक्रम रास्ते में कुछ भी नहीं बोलेगा। यदि बोला तो मैं उसी समय फिर से पेड़ पर जा लटकुँगा।
विक्रम को यह शर्त स्वीकार करना ही पड़ता क्योंकि बेताल के योग-बल के सामने उनकी शक्ति कमजोर पड़ जाती थी।
राह में चलते समय बेताल राजा विक्रम को कहानी सुनाता जिससे की राह जल्दी कट जायें और इस भयानक डरावनी वन में मनोरंजन भी हो।
विक्रम कुछ बोल भी नही सकते थे। वे बेताल के शर्तों से बाध्य थे।
कहानी के अंत में बेताल राजा से एक प्रश्न करता था जिसका उत्तर जानने के लिए बेताल के साथ-साथ गंधर्व, देवतागण, ॠषिगण भी उत्सुक रहते थे।
राजा विक्रम बड़े ही न्याय-प्रतापी थे। तीनों लोकों में उनका न्याय सर्वश्रेष्ठ माना जाता था और बेताल का जो पेचीदगियों से भरा प्रश्न होता था वो न्याय आधारित ही होता था इसी कारण सभी उनके न्याय को सुनने के लिए उत्सुक रहते थे लेकिन जैसे ही वे उत्तर देते, बेताल उत्तर सुनने के बाद हवा में उड़ के भाग जाता क्योंकि विक्रम न बोलने की शर्त तोड़ देते। यहां एक और परेशानी थी कि बेताल कहानी के अंत में राजा विक्रम से कहता यदि तू मेरे प्रश्न का उत्तर जानते हुए भी नहीं बताएगा तो मैं अपने योगबल से तुम्हारे सिर के टुकड़े-टुकड़े कर दूँगा।
विक्रम बाध्य हो जाते क्योंकि उन्हें उत्तर ज्ञात होता था।
यदि विक्रम चाहते तो बेताल की कहानियों से अपना ध्यान हटा सकते थे जिसके फलस्वरूप वे कहानी ठीक से नही सुन पाते और उनको उत्तर भी पता नही होता साथ ही न बोलने की शर्त भी नहीं टूटती परन्तु उन्होंने ऐसा नहीं किया क्योंकि विक्रम जानते थे बेताल बहुत ज्ञानी हैं उसके कहानियों में जीवन, राजकाज तथा गृहस्थी से संबंधित अनेक ज्ञान की बातें छिपी हैं।
इस कारण वे बेताल की कहानियों को बड़े गौर से सुनते।

इन सब बातों में उलझाकर हम अपने पाठकों का दिल न दुखायेंगे किन्तु कहानी पढ़ने से पहले इन बातों का ज्ञान होना आवश्यक था।

दोस्तों बेताल ने जो मनोरंजक कहानियां विक्रम को सुनाये थे उन सभी को आदरणीय सोमदेव जी ने लिखा हैं। इनका पूरा नाम सोमदेव भट्ट था जो संस्कृत भाषा के कवि थे। ऐसा माना जाता है कि इनका जन्म कश्मीर में हुआ था।

यहां पर यह कहना की बैताल पचीसी को सोमदेव जी ने लिखा हैं उचित न होगा।
काफी समय पहले कविवर सोमदेव जी ने अपने काव्य ग्रंथ “कथा सरित सागर” की रचना की थी जो वास्तव में पौशाचिक भाषा में लिखित काव्य ग्रंथ “वृहत कथा” का संस्कृत में अनुवाद हैं।
“वृहत कथा” के लेखक ‘गुणाढ्य’ है जो आंध्रवंशी राजा सातवाहन के दरबार में मंत्री थे। ग्रंथ ‘वृहत कथा’ अभी उपलब्ध नही हैं।

इस ग्रंथ का सोमदेव जी ने दो भागों में अनुवाद किया हैं।
‘वेताल पंचिविंशति’ अथवा ‘बेताल पच्चीसी’ एवं ‘सिंहासन द्वत्रिंशिका’ अथवा ‘सिंहासन बत्तीसी’ “कथा सरित सागर” के ही दो भाग हैं।

बेताल पच्चीसी में जहां राजा विक्रम और बेताल की कहानियां हैं वहीं सिंहासन बत्तीसी में राजा भोज को बत्तीस कठपुतलियों द्वारा सुनाये राजा विक्रम जो विक्रमादित्य के नाम से भी जाने जाते हैं की कहानियों का संकलन हैं।

दोस्तों इस ब्लॉग पर बेताल पचीसी की कहानियों को उपलब्ध कराने के लिए मैंने कई स्त्रोतों का सहारा लिया हैं। जैसे- इंटरनेट पर उपलब्ध कई बेवसाईटों, कुछ पुरानी पुस्तकों, युट्युब पर उपलब्ध विडियो तथा साथ ही अपनी स्मरण शक्ति का भी उपयोग कहानी लिखने में किया हैं। मैंने यहां त्रुटिरहित कहानी उपलब्ध कराने की पूर्ण कोशिश की है क्योंकि अधिकांश बेवसाईटों पर ‘कॅापी-पेस्ट चालाकी’ का उपयोग करने के फलस्वरूप कहानी अधूरी रह गई हैं। आप यदि विकीशोर्स पर विक्रम बेताल की कहानियों को देखें तो आपको कई कहानी अधूरी प्रतीत होगी। मैंने भी विकीशोर्स का सहारा कुछ हद तक लेकर उन सभी कहानियों को पुनः संशोधित करके यहां प्रकाशित किया हैं। अंत में कुछ कहानियां विकीशोर्स से मिलती-जुलती दिखेगी लेकिन ये कहना कि मैंने विकीशोर्स से कॅापी किया उचित न होगा।

विक्रम बेताल की सभी कहानियों की सूची

इति – विक्रम बेताल की कहानी(Vikarm Betaal ki kahani-in Hindi)

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